बातचीत 12th हिंदी


आज हम आप लोगों को बातचीत के बारे में बताएंगे


   

           बातचीत      



वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. बालकृष्ण भट्ट का जन्म कब हुआ था?

(क) 23 जून, 1844
(ख) 20 जुलाई, 1944
(घ) इनमें से कोई नहीं
(ग) 25 जून, 1945

2. बालकृष्ण भट्ट किस युग के रचनाकार हैं ?
(क) द्विवेदीयुग
(ख) भारतेंदु युग
(घ) इनमें से कोई नहीं
(ग) रामचन्द्र शुक्लयुग

3.बालकृष्ण भट्ट की मृत्यु किस सन् में हुयी थी?
(क) 1844
(ख) 1944
(ग) 1914
(घ) इनमें से कोई नहीं

4.बालकृष्ण भट्ट ने किस पत्रिका का संपादन किया था?
(क) हिन्दी प्रकाश
(ख) हिन्दी प्रदीप
(ग) हिन्दी ग्रन्थावली
(घ) इनमें से कोई नहीं

5. बाल विवाह नामक नाटक के लेखक कौन हैं ?
(क) चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
(ख) मोहन राकश
(ग) उदय प्रकाश
(घ) इनमें से कोई नहीं


6.हम सौ अजान एक सुजान नामक उपन्यास के लेखक कौन हैं ?
(क) प्रेमचन्द
(ख) बालकृष्ण भट्ट
(ग) चंद्रधर शर्मा गुलेरी
(घ) इनमें से कोई नहीं उत्तर-ख)

7.बालकृष्ण भट्ट बातचीत के माध्यम से क्या बताना चाहते हैं ?
(क) बातचीत की महत्ता
(ख) बातचीत की उपयोगिता
(ग) बातचीत की शैली
(घ) बातचीत के लक्षण



अति लघुउत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. बालकृष्ण भट्ट किस युग के रचनाकार हैं?
उत्तर- भारतेंदु युग।

प्रश्न 2. बालकृष्ण भट्ट का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर- 23 जून, 1844 को इलाहाबाद में ।

प्रश्न 3. बालकृष्ण भट्ट ने किस पत्रिका का संपादन किया?
उत्तर- 'हिंदी प्रदीप'।

प्रश्न 4. बालकृष्ण भट्ट के प्रहसन के नाम बताएँ।
उत्तर- जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विष, आचार विंडबन।

प्रश्न 5. बालकृष्ण भट्ट के कुछ उपन्यास के नाम बताए।
उत्तर- रहस्यकथा-नूतन ब्रह्मचारी, हम सौ अजान एक सुजान, रसातल यात्रा, गुप्त वैरी,
सद्भाव का अभाव।

प्रश्न 6. बातचीत के माध्यम के बालकृष्ण भट्ट क्या बताना चाहते हैं।
उत्तर- बात-चीत की शैली।

प्रश्न 7. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबंधकार के रूप में बालकृष्ण भट्ट की तुलना
कससे की है।
उत्तर- एडीसन और स्टील से।

प्रश्न 8. बालकृष्ण भट्ट एक प्रमुख नाटककार भी हैं। प्रमुख नाटकों के नाम बताएँ।
उत्तर- पद्मावती, किरातार्जुनीय, वेणीसंहार, शिशुपाल वध, रेल का विकट खेल, बाल
ववाह।

प्रश्न 9.आर्ट ऑफ कनवरसेशन क्या हैं?
उत्तर- बातचीत की एक विशेष शैली है जो यूरोप के लोगों द्वारा अपनाया जाता है।

प्रश्न 10. उत्तम प्रकार बातचीत करने का क्या तरीका है-
उत्तर- हम वह शक्ति अपने में पैदा कर सकें कि अपने आप बात कर लिया करें।
घुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. बालकृष्ण भट्ट द्वारा लिखित निबंध 'बातचीत के केंद्रीय भाव को स्पष्ट करें।
उत्तर- निबंध 'बातचीत' बालकृष्ण भट्ट द्वारा लिखित एक प्रमुख निबंध है। इस निबंध में
लेखक ने बातचीत की शैलियों का विवेचन किया है। उन्होंने यह कहा है कि आम दिनों के जीवन
मनुष्य किसी भी क्रिया को करने के लिए बातचीत करते रहते हैं। इस बातचीत का केंद्रीय मान
ह है कि लोगों को अपने आप में वह शक्ति उत्पन्न करना चाहिए जिससे कि वे किसी भी
वषय-वस्तु का चिंतन करने के लिए अपने आप बात कर लिया करें। अपने आप बात करने का
वि यह है कि आपसी बातचीत की शैली व्यावहारिक और रुचिपूर्ण होना चाहिए। साथ ही लोगों
मन में जो बात उत्पन्न हो रही है, उसको करने के लिए मन-ही-मन चिंतन-मनन करके उस
वषय-वस्तु के बारे में सभी निर्णय लेना चाहिए। बातचीत की शैली मधुर होना चाहिए।



बातचीत पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1.अगर हममें वाशक्ति न होती तो क्या होता?
उत्तर-अगर हममें वाशक्ति न होती तो यह समस्त सृष्टिगूंगी प्रतीत होती। सभी लोग चुपचाप बैठे रहते और
हम जो बोलकर एक-दूसरे के सुख-दुख का अनुभव करते हैं वाशक्ति न होने के कारण एक-दूसरे से कह-सुन. भी नहीं पाते और न ही अनुभव कर पाते।




प्रश्न 2.
बातचीत के संबंध में वेन जॉनसन और एडीसन के क्या विचार हैं?

उत्तर-बातचीत के संबंध में वेन जॉनसन का मत है कि
बोलने से ही मनुष्य के सही रूप का साक्षात्कार
होता है। यह बहुत ही उचित जान पड़ता है।।
एडीसन का मत है कि असल बातचीत सिर्फ दो
व्यक्तियों में हो सकती है जिसका तात्पर्य हुआ जब दो आदमी होते हैं तभी अपना दिल एक-दूसरे के सामने खोलते हैं। जब तीन हुए तब वह दो बात कोसों दूर गई। कहा भी है कि छह कानों में पड़ी बात खुल जाती है। दूसरे यह कि किसी तीसरे आदमी के आ जाते ही या तो वे दोनों अपनी बातचीत से निरस्त हो बैठेंगे या उसे निपट मूर्ख अज्ञानी, समझा बना लेंगे। जैसे गरम दूध और ठंडे पानी के दो बर्तन पास-पास असर होगा ३ आर्ट ऑफ कनवरशन बातचीत करने की एकमा काव्यकला प्रवीण मिलता गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट सेटा के रखे जाएँ तो एक का असर दूसरे में पहुँच जाता है अर्थात दध ठंडा हो जाता है और पानी

प्रश्न 3.
'आर्ट ऑफ कनवरशेसन' क्या है?
उत्तर-आर्ट ऑफ कनवरसेशन' बातचीत करने की एक कला (प्रविधि) है जो योरप के लोगों में ज्यादा प्रचलित है। इस बातचीत की प्रविधि की पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वमंडली में है। ऐसी चतुराई के साथ इसमें प्रसंग छोड़े जाते हैं कि जिन्हें सुन कान को अत्यन्त सुख मिलता है। साथ ही इसका अन्य नाम शुद्ध गोष्ठी है। शुद्ध गोष्ठी की बातचीत को यह तारीफ है कि बात करनेवालों की जानकारी अथवा पंडिताई का अभिमान या कपट कहीं एक बात में ही
प्रकट नहीं होता वरन् कर्ण रसाभास पैदा करने वाले शब्दों को बरकते हुए चतुर सयाने अपने बातचीत को सरस रखते हैं। दयनीय स्थिति यह है कि हमारे यहाँ के पंडित आधुनिक शुष्क बातचीत में जिसे शास्त्रार्थ कहते हैं, वैसा रस नहीं घोल सकते।

प्रश्न 4.
मनुष्य की बातचीत का उत्तम तरीका क्या हो सकता है? इसके द्वारा वह कैसे अपने लिए सर्वथा नवीन संसार की रचना कर सकता है?

उत्तर-मनुष्य में बातचीत का सबसे उत्तम तरीका उसकाआत्मवार्तालाप है। मनुष्य अपने अन्दर ऐसी शक्ति विकसित करे जिसके कारण वह अपने आप से बातकर लिया करे आत्मवार्तालाप से तात्पर्य क्रोध पर
नियंत्रण है जिसके कारण अन्य किसी व्यक्ति को कष्ट न पहुँचे। क्योंकि हमारी भीतरी मनोवृति प्रशिक्षण नए-नए रंग दिखाया करती है। वह हमेशा बदलती रहती है। लेखक बालकृष्ण भट्टजी इस मन को प्रपंचात्मक संसार का एक बड़ा आइना के रूप
में देखते हैं जिसमें जैसा चाहो वैसी सूरत देख लेना कोई असंभव बात नहीं। अतः मनुष्य को चाहिए कि मन के चित्त को एकाग्र कर मनोवृत्ति स्थिर कर अपने आप से बातचीत करना सीखें। इससे आत्मचेतना का विकास होगा। उसी वाणी पर नियंत्रण हो जायेगा जिसके कारण दुनिया से किसी से न बैर रहेगा और बिना प्रयास के हम बड़े-बड़े



प्रश्न 5.इस निबन्ध की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर-इस निबंध (बातचीत) के माध्यम से विद्वान निबंधकार ने बातचीत करने के लिए ईश्वर द्वारा दी गई वाक्शक्ति को अनमोल बताया है और कहा है कि मनुष्य इसी शक्ति के कारण पशुओं से अलग है,बढ़कर है। बातचीत के विभिन्न तरीके जैसे आर्ट ऑफ कनवरसेशन, हृदय गोष्ठी आदि के बारे में बताया गया है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से उत्तम तरीके से बातचीत करता हुआ
उनकस आनन्द ले सकता है। इस निबंध में दो
विदेशी निबन्धकारों का एडीसन एवं वेन जॉनसन मत दिया गया है जिसमें एडीसन ने यह कहा है कि जब तक मनुष्य बोलना नहीं बोलता उसके गुण-दोष नहीं प्रकट होते। वेन जॉनसन का मत है कि बोलने से ही मनुष्य के सही रूप का साक्षात्कार होता है।निबंध में यह भी बताया गया है कि मनुष्य को अपने
हृदयं (मन) पर काबू रखकर बोलना या बातचीत करनी चाहिए। यदि ऐसा हो तो वह सर्वथा नवीन संसार की रचना कर सकता है

1.राम-रमौवल' का क्या अर्थ है? इसका वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-राम-रमौवल-चार से अधिक व्यक्तियों की बातचीत राम-रमौवल कहलाती है। 'राम-श्याम मोहन और सोहन रेलगाड़ी में राम-रमौवल कर रहे थे।



बातचीत पाठ के सारांश

प्रस्तुत कहानी 'बातचीत' के लेखक महान् पत्रकार बालकृष्ण भट्ट हैं : बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिन्दी गद्य के आदि निर्माताओं और उन्नायक रचनाकारों में एक हैं। बालकृष्ण भट्ट जी बातचीत निबन्ध के माध्यम से मनुष्य की ईश्वर द्वारा दी गई अनमोल वस्तु वाकशक्ति का सही इस्तेमाल करने को बताते हैं। महान् लेखक बताते हैं कि यदि मनुष्य में वाक्शक्ति न होती तो हम नहीं जानते कि इस गूंगी सृष्टि का क्या हाल होता। सबलोग मानों लुंज-पुंज अवस्था में एक कोने में बैठा दिए गए होते। लेखक बातचीत के विभिन्न तरीके भी बताते हैं। यथा घरेलू बातचीत मन रमाने का ढंग है। वे बताते हैं कि जहाँ आदमी की अपनी जिन्दगी मजेदार बनाने के लिए खाने, पीने, चलने, फिरने आदि की जरूरत है, उसी प्रकार बातचीत की भी अत्यन्त आपयकता है।
हमारे मन में जो कुछ मवाद (गंदगी) या धुआँ जमा रहता है वह बातचीत के जरिए भाप बनकर हमारे मन में बाहर निकल पड़ता है।
इससे हमारा चित्त हल्का और स्वच्छ हो परम आनंद में मग्न हो जाता है। हमारे जीवन में बातचीत का भी एक खास तरह का मजा होता है। यही नहीं, भट्टजी बतलाते हैं कि जब तक मनुष्य बोलता नहीं तबतक उसका गुण-दोष प्रकट नहीं होता। महान् विद्वान वेन जानसन का कहना है कि बोलने से ही मनुष्य के रूप का सही साक्षात्कार हो पाता है। वे कहते हैं कि
चार से अधिक की बातचीत तो केवल राम-रमौवल कहलाएगी। योरप (यूरोप) के लोगों से बातचीत का हुनर है जिसे आर्ट ऑफ कनवरसेशन कहते हौं।इस प्रसंग में ऐसे चतुराई से प्रसंग छोड़े जाते हैं कि जिन्हें कान को सुन अत्यन्त सुख मिलता है। हिन्दी में इसका नाम सुहृद गोष्ठी है। बालकृष्ण भट्ट बातचीत का उत्तम तरीका यह मानते हैं कि हम वह
शक्ति पैदा करें कि अपने आप बात कर लिया करें।इस प्रकार आर्ट ऑफ कनवरसेशन मनुष्य के द्वाराआपस में बातचीत की उत्तम कला है जिसके द्वारा बातचीत को हमेशा आनन्दमय बनाए रहते हैं।


बातचीत लेखक परिचय बालकृष्ण भट्ट (1844-1914)
जीवन-परिचय :
हिन्दी के प्रारंभिक युग के प्रमुख पत्रकार,
निबन्धकार तथा हिन्दी के आधुनिक आलोचना के प्रवर्तकों में अग्रगण्य बालकृष्ण भट्ट का जन्म 23जून, सन 1844 ई. के दिन हुआ इनके पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था जो एक व्यापारी थे तथा माता का नाम पार्वती देवी था जो एक सुसंकृत महिला थी। इन्होंने बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि जगाई। भट्ट जी का निवास स्थान इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश था। इन्होंने प्रारंभ में संस्कृत का अध्ययन किया तथा सन् 1867 में प्रयाग के मिशन स्कूल में एंट्रेंस की परीक्षा दी। ये सन् 1869से 1875 तक प्रयाग के मिशन स्कूल में अध्यापन में
कार्यरत रहे।सन् 1885 में प्रयाग के सी.ए, वी.
स्कूलमें संस्कृत सन् 1885 में प्रयाग के सी.ए, वी. स्कूल में संस्कृत का अध्यापन किया। सन् 1888 में प्रयाग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त हुए, किन्तु अपने उग्र स्वभाव के कारण इन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी और फिर ये लेखन कार्य में लग गए।पिता के निधनोपरांत इन्हें विषम परिस्थितियों का
सामना करना पड़ा। इन्होंने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रेरणा से सन् 1877 में 'हिन्दी प्रदीप' नामक मासिक पत्रिका निकालनी प्रारंभ की और इसे 33वर्षों तक निकालते रहे। इन्होंने घोर आर्थिक संकटों से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के बालकृष्ण भट्ट का निधन 20 जुलाई, सन् 1914 के दिन हुआ, जो कि हिन्दी साहित्य के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।
रचनाएँ:बालकृष्ण भट्ट की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं
उपन्यास-
रहस्य कथा, नूतन ब्रह्मचारी, गुप्त वैरी, सौ 

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