महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न हिंदी 10th


महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न
1. "राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा" कविता का भाव स्पष्ट करें।

उत्तर- प्रस्तुत पद्यांश गुरुनानक द्वारा रचित प्रथम पद से उद्धृत है। इसमें कवि जपनाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि जिसने जन्म लेकर राम की कीर्तन नहीं की उसका जीवन निरर्थक है। जिस व्यक्ति का खान-पान, रहन-सहन आदि विष से परिपूर्ण होता है वह निरुद्धेश्य भटकता रहता है। जो रामनाम के महत्व की अवहेलना कर शास्त्र-पुराणों की चर्चा करने तथा त्रिकाल संध्यादि में मस्त हो जाता है, वैसा व्यक्ति बिना गुरु की वाणी या रामनाम के बिना इस संसारिक माया-मोह में उलझ कर रह जाता है। इसमें कवि बाह्याडम्बर की आलोचना करते हुए कहते हैं कि जटा बढ़ाकर, भस्म लगाकर तीर्थाटन करने से लोगों को आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। कवि का कहना है कि गुरु कृपा और रामनाम ही जीवन की सार्थकता है। रामनाम के स्मरण से ही सांसारिक माया-मोह से मुक्ति मिल सकती है।


2. आधुनिक जीवन में उपासना के प्रचलित रूपों को देखते हुए नानक के इन पदों की क्या प्रासंगिकता है ? अपने शब्दों में विचार करें।

उत्तर- आज उपासना के विविध रूप प्रचलित हैं। घरों में पूजा, प्रवचन श्रवण, धार्मिक त्योहारों में सम्मिलित होना, तीर्थ स्थलों में भ्रमण इत्यादि उपासना के रूप अपनाए जा रहे हैं। राजनीतिक भ्रष्टाचार के साथ-साथ धार्मिक भ्रष्टाचार के भी समाचार मिल रहे हैं। मनुष्य गलाघोंटू आर्थिक प्रतियोगिता की चपेट में झुलस रहा है। जीवन में शांति का स्थान तनाव ने ले लिया है। सात्विक की जगह तामसिक भोजन लोग कर रहे हैं। सोमरस की दुकान पर भीड़ लग रही है। मटे का सेवन कोई नहीं कर रहा है। अतः ऐसे युग में गुरुनानक के संदेशों की प्रासंगिकता और बढ़ गयी है।
राम नाम लेकर ईश्वरत्व की प्राप्ति करनी चाहिए। मीठी वाणी बोलनी चाहिए। गुरु के शब्दों का अनुसरण करना चाहिए। डंड, कमंडल, चोटी गुथियाना, धोती, तीरथ और तीर्थ का झूठा भ्रमण नहीं करना चाहिए। राम नाम के बिना शांति नहीं मिलने वाली है। हरि नाम लेने वाला ही इस संसार से पार उतर सकता है।


3. निम्नलिखित पद्यांश की व्याख्या करें।
दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन, [BSEB 2014A]
अधरों में चिर निरव रोदन,
युग-युग के तम से विषण्ण मन
वह अपने घर में प्रवासिनी !

उत्तर– प्रस्तुत पंक्तियाँ भारतमाता शीर्षक कविता से ली गई है। इसके कवि सुमित्रानंदन पंत है। कवि का कहना है कि भारतमाता गाँवों में निवास करती है। भारत के लोग गाँवों में निवास करते हैं। दीनता उनके चेहरे पर जड़ी हुई है। पलकें गिरती नहीं हैं। आँखें और चेहरा झुका हुआ है। होठों पर लम्बी अवधि से नि:शब्द रूलाई दिखाई पड़ती है। युग-युग से चले आ रहे अंधकार के कारण मन विषैला हो गया है। भारतमाता अपने घर में ही प्रवासिनी-परदेशिनी बनी हुई है। अंग्रेजों के शासन के कारण भारत गुलाम बना हुआ है।


4. निम्नांकित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
'तीस कोटि सन्तान नग्न तन,
अर्ध क्षुधित, शोषित, निरस्त्रजन,
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन,
नत मस्तक तरू-तल निवासिनी।

उत्तर- भारतमाता ग्रामवासिनी' शीर्षक कविता की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि सुमित्रानन्दन पंत कहते हैं कि तीस करोड़ संतान वस्त्रहीन हैं। उनके शरीर पर वस्त्र नहीं है। वे भूखे हैं। उनका पेट आधा खाली है। वे शोषित हैं। उनका शोषण होता है। वे अस्त्र विहीन हैं। वे मूर्ख हैं। वे असभ्य हैं। वे सभ्य नहीं हुए। वे गरीब हैं। वे धनविहीन हैं। उनका मस्तक झुका हुआ है। वे पेड़ों के नीचे निवास करते हैं। भारतमाता अर्थात् भारत के लोगों की दशा दयनीय है।

5. कवि की दृष्टि में आज भारत का तप-संयम क्यों सफल है ?

उत्तर–कवि की दृष्टि से आज भारत का घोर तप और संयम सफल हुआ है। उसने अहिंसा रूपी अमृत के समान अपना दूध पिलाकर भारतीयों के मन के भय को दूर किया है । आज भारत अपने तप और संयम के बल अज्ञान के अंधकार और भ्रांतियों के जाल को तोड़ चुका है । भारत इसी तप और संयम के रास्ते चलकर नये-नये विकास की मंजिल को छू रहा है । हमारी प्रगति और विकास का आधार शांति, अहिंसा, तप और संयम है।


6. बहादुर, किशोर, निर्मला और कथावाचक का चरित्र-चित्रण करें।

उत्तर- वहादर' कहानी में कहानीकार अमरकांत एक नौकर की बहाली के बाद परिवार के लोगों की विरोधी प्रतिक्रियाओं का अभिलेख है । यह मध्यम वर्ग की जानी-मानी त्रासदी है । नौकर एक, अमीरी के प्रतीक में सबलोग रखना चाहते हैं, लेकिन घर में सामंजस्यपूर्ण ढंग से रखना परिवार के कम लोग जानते हैं । 'कहानी में मॅझोल शहर के नौकर की लालसा वाले एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में काम करनेवाले बहादर की कहानी है एक नेपाली गवई गोरखने की । परिवार का नौकरी पशा मुखिया तटस्थ स्वर में बहादुर के आने और अपने स्वच्छंद निश्छल ग्वभाव की आत्मीयता के साथ नौकर के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद एक दिन स्वभाव की उसी स्वच्छंदता के साथ हर हृदय में एक कसकती अंतर्व्यथा देकर चल जाने की कहानी कहता है । लेखक घर के भीतर और बाहर के यथार्थ को विना बनाई सँवारी सहज परिपक्व भाषा में पूरी कहानी बयान करता है ।। हिन्दी कहानी में एक नये नायक को यह कहानी प्रतिष्ठित करती है ।'

बहादुर- बहादर बारह तेरह वर्ष की उम्र का ठिगना, चकइट शरीर, गोरा रंग और चपटा मुंह का नेपाली था । वह ईमानदारी. निष्ठा एवं समर्पण के भाव से लेखक के घर में नौकर का काम करता था । लेखक उसकी निश्छलता का प्रशंसक था । ग्त्री निर्मला भी सुखी हो रही थी । लेकिन बेटा किशोर उसकी पिटाई करता था । एक रिश्तेदार ने रुपयों की चोरी का आरोप लगाकर उसे बदनाम कर दिया । निर्मला ने भी चाँटे लगा दिए । वह भाग खड़ा हुआ ।

किशोर- लेखक का बड़ा बेटा किशोर काफी शान-शौकत और रोब-दाब से रहने का कायल था । उसने बहादुर पर कड़ाई करना प्रारंभ कर दिया । तेल-मालिश भी बहादुर से कगता था । बहादुर में गलती होने पर गर्जन-तर्जन करने लगता । उसे बरी बरी गालियाँ देने लगता था । किशोर ने बहादुर की डंडे से पिटाई भी की। किशोर बहादुर को 'सुअर का बच्चा' कहता था ।

निर्मला- निर्मला लेखक की पत्नी थी । निर्मला ने बहादुर को कुछ व्यावहारिक उपदेश दिए मुहल्ले के लोगों से दूर रहने का । निर्मला ने बहुत ही उदारतापूर्वक नौकर के नाम से 'दिल' शब्द उड़ा दिए । 'दिल बहादुर' अब बहादुर हो गया । बहादर को वह नाश्ता कराती । कहती--मैं दूसरी औरतों की तरह नहीं हूँ, जो नौकर-चाकर को जलाती-भुनाती हूँ । मैं तो नौकर को बच्चे की तरह रखती हूँ । निर्मला ने बहादुर को एक दरी दे दी थी । बहादुर की वजह से घर भर को खूब आराम मिला । पहले निर्मला बहादुर को रोटियाँ बनाकर देती थी। बाद में उसे ही बनाने के लिए कहा । किशोर और निर्मला बहादुर की पिटाई भी करते थे । निर्मला के चाँटे के बाद बहादुर भाग गया । निर्मला को अंत में पछतावा हुआ ।

कथावाचक- कथावाचक लेखक ही है। पूरी कहानी में लेखक निष्पक्ष और निलिप्त है। वह बिना लाग-लपेट, सुधार संशोधन और संकोच-तटस्थ है। बहादुर उससे नि:संकोच होकर बातें करता । बहादुर लेखक की तरफ मुँह झुका कर मुस्काने लगता था। बहादुर कहता बावजी, बहिन जी का एक सहेली आया था। बाबूजी सिनमा गया था। बहादुर की हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हो। कथावाचक लेखक से बहादुर बात करना चाहता, पर लेखक गंभीर
भी हो जाता। लेखक कथा में नि:संग व्यक्तित्व लेकर प्रकट होता है।


7. लक्ष्मी कौन थी? उसकी पारिवारिक परिस्थिति का चित्र प्रस्तत कीजिए। [BSEB 2011C, 2012C, 2013A, 2016A]

उत्तर- लक्ष्मी गाँव में रहनेवाली एक गरीब, पर संघर्षशील महिला है जिसका पति कलकत्ता में नौकरी करता है। पति लक्ष्मण कलकत्ता में नौकरी करके पत्नी को जो कुछ भेजता है, उससे गुजारा न होने की वजह से तहसीलदार साहब के घर का छिटपुट काम करके लक्ष्मी जो कुछ पाती है, उससे अपनी कमी पूरी कर लिया करती है। उसके पूर्वज एक बीघा खेत छोड गए हैं। एक टुकड़ी जमीन भी है। हल किराये पर लेकर उस बीघे भर में खेती करवायी थी लक्ष्मी ने। सूखे से वह हार नहीं मानती और बाढ़ का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहती थी। देबी नदी के बाँध के नीचे लक्ष्मी का घर था। फिर भी बाढ़ से कभी वह हार नहीं मानती थी।


8. कहानी "ढहते विश्वास' के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें। [BSEB 2014AI, 2017A]

उत्तर- कहानीकार सातकोड़ी होता ने अपनी कहानी का शीर्षक दिया है _ 'ढहते विश्वास' । विश्वास एक-एक कड़ी जोड़कर बनता है । एक-एक कड़ी टूटने से विश्वास की दीवार गिर जाती है । लोगों का विश्वास भगवान पर से भी उठ जाता है । विपत्ति भी अकेले नहीं आती । विधि के निर्देशों का पालन हमेशा मानव करता आया है । मनुष्य कभी विरोध नहीं कर सका । यही उसकी विडम्बना है, यही उसका बेसहारापन है । गरीबी की मार सहते हुए में बाढ़ आ जाए या सूखा आ जाय तो संकट और गहरा हो जाता है । विश्वास ढहता नहीं। लेकिन यह कहानी ढहते विश्वास पर खड़ी की गयी है । अतः यह शीर्षक अत्यन्त प्रभावोत्पादक है। यह शीर्षक अत्यन्त प्रभविष्णु है । यह शीर्षक सार्थक एवं इस कहानी के केन्द्र में हैं।


9. मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए । [BSEB 2011C, 2013C, 2014A]

उत्तर- मंगम्मा का चरित्र अत्यन्त उत्तम है। वह परिश्रमी स्त्री है । वह दही बेचती है । पति नहीं रहने पर किसी ऐरे-गैरे के चक्कर में वह नहीं पड़ती। वह अपना धर्म बचाए रखती है । हाँ, बहू से कुछ खटपट जरूर हुई । पर बहू ने पोते को वात्सल्य हेतु सास के पास भेज दिया । सास-बहू-पोते सभी एक दिन दही बेचने गए । बहू सास के अनुकूल हो गयी ।
कथावाचिका को लगा मंगम्मा भी अक्ल से कुछ कम नहीं । घर-घर का किस्सा है—माँ बेटे पर से अपना हक नहीं छोड़ना चाहती, बहू पति पर अधिकार जमाना चाहती है । यह सारे संसार का किस्सा है । यह नाटक चलता ही रहता है। मंगम्मा उदार चरित्र की सास है।
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