Polytical Science Most V.V.I Short Ans Type questions


Polytical Science Most V.V.I Short Ans Type questions
1. लोकतंत्र में द्वंद्व से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- लोकतंत्र सैद्धांतिक रूप से समानता पर आधृत शासन-प्रणाली है। परंतु, विभिन्न लोकतांत्रिक पद्धतियों में विरोधाभास के कई उदाहरण मिलते हैं अर्थात् इसके ठीक विपरीत स्थिति होती है। इसे ही लोकतंत्र में द्वंद्व कहा गया है। अमेरिका में व्याप्त रंगभेद इसका उदाहरण है।

2. सामाजिक विभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है। उदाहरण के साथ स्पष्ट करें।

उत्तर :- लोकतंत्र में कोई भी सरकार जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों में शासित होती है। ये जनप्रतिनिधियों से शासित होती है। ये जन प्रतिनिधि किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य होते हैं। प्रत्येक राजनीतिक पार्टी का अपना इतिहास होता है। इनकी अपनी निश्चित राजनीतिक विचारधारा और नीतियाँ होती है। इसी आधार पर जनता इनका समर्थन करती है। चुनाव के समय राजनीतिक दल अपना प्रत्याशी खड़ा करते हैं। चयनित उम्मीदवार बहुमत हासिल कर सरकार बनाते हैं जो दल बहुमत प्राप्त नहीं कर पाते वे विपक्ष की भूमिका निभाते हैं। वे सदन के अंदर और बाहर जनता की समस्याओं को उठाते हैं।

3. भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?

उत्तर—भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता है अनेकता में एकता। अर्थात् विभिन्न रूप-रंग, वेश-भूषा वालों का समाज में सामंजस्य।

4. सामाजिक विभेद और सामाजिक विभाजन में अंतर बताएँ।

उत्तर- विविधता विकासशील समाजों की विशेषता है। एक देश या क्षेत्र में निवास करने वाले जाति, धर्म, सम्प्रदाय के लोगों के बीच, जो विभिन्नताएँ होती हैं, वे सामाजिक विभेद कहलाती है। परन्तु धन, रंग, क्षेत्र का विभेद सामाजिक विभाजन का रूप ले लेता है। भारत में सवर्ण और दलित, गोरे-काले या गरीब-अमीर का विभेद सामाजिक विभेद है।

5. विविधता में एकता का क्या अर्थ है ?

उत्तर— लोकतंत्र में विविधता का होना एक स्वभाविक तथ्य है। विविधता में एकता लोकतंत्र का एक आवश्यक गुण हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को अपनाया जाता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य में विभिन्न धर्माबलंबी एक साथ मिलकर रहते हैं। इस प्रकार के राज्य में यह धारणा बलवती हो जाती है कि उनके धर्म तो भिन्न-भिन्न अवश्य है, परंतु उन्हें यह विश्वास हो जाता है कि सब कुछ के बावजूद भी वे एक ही राष्ट्र के निवासी हैं। स्पष्ट है कि विविधता में एकता भारतीय लोकतंत्र व्यवस्था की एक अनोखी विशेषता है।


6. सामाजिक विभेद किस प्रकार सामाजिक विभाजन के लिए उत्तरदायी है ?

उत्तर- वास्तव में सामाजिक विभेद सामाजिक विभाजन और सामाजिक संघर्ष के लिए मूल रूप से उत्तरदायी होता है। प्रत्येक समाज में विभिन्न जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र के लोग निवास करते हैं। सामाजिक विभेद का मूल कारण जन्म को माना जाता है। विविधता अच्छी चीज है।

7. भारत में राज्यों का पुनर्गठन कब किया गया था ?
उत्तर - भारत में भाषा के आधार पर पहली बार राज्यों का पुनर्गठन 1956 में किया गया था। आंध्रप्रदेश भाषा के आधार पर बनने वाला पहला राज्य था।


8. लैंगिक असमानता क्या है ?

उत्तर- लिंग के आधार पर पुरुषों और स्त्रियों में भेद करना, स्त्रियों को पुरुषों की तुलना में दोयम दर्जे का और हीन समझने की भावना लैंगिक असमानता है। लड़कियों को लड़कों की तुलना में कम महत्त्व दिया जाना, शिक्षा, खान-पान, पालन-पोषण में अंतर करना, लड़की को घर की चहारदीवारी में कैद रखना और घर के काम काज तक सीमित रखना, स्त्रियों पर पुरुषों का नियंत्रण आदि लैंगिक असमानता के उदाहरण है।

9. सामाजिक विविधता राष्ट्र के लिए कब घातक बन सकती है ?

उत्तर–सामाजिक विविधता वैसे तो समाज के विकास का लक्षण है लेकिन जब यह विविधता लोगों में तनाव, संघर्ष व अलगाववाद को जन्म देती है तो यह राष्ट्र के लिए घातक बन जाती है। भारत में जाति, धर्म, संस्कृति, भाषा आदि की विविधताएँ पायी जाती हैं। लेकिन निहित स्वार्थों तथा सहनशीलता के अभाव में ये विविधताएँ सामाजिक तनाव का कारण बन जाती हैं, जो राष्ट्रीय एकता के लिये घातक है।

10. रंग भेद क्या है ?
उत्तर—मनुष्यों में गोरे और काले रंग के आधार पर विभेद करना। काले रंगवालों को गोरे रंगवाले लोगों की अपेक्षा कई अधिकारों से वंचित रखना।

11. सांप्रदायिकता क्या है ?

उत्तर— जब समाज में एक धर्म के लोग दूसरे धर्म को छोटा एवं अपने धर्म को सर्वोच्च समझने लगते हैं तो समाज में धार्मिक आधार पर बिलगाव उत्पन्न होती है। इसी अवधारणा को सांप्रदायिकता कहते हैं। यह किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

12. जाति और नस्ल में क्या अंतर है ?

उत्तर- जाति और नस्ल समान नहीं है क्योंकि जाति का आधार सामाजिक होता है और नस्ल का आधार जीवशास्त्री है। किंतु नस्ल जाति की तरह ही काफी हद तक समाजशास्त्रीय और वैधानिक वर्गीकरण है।

13. बंधुआ मजदूर किसे कहते हैं ?

उत्तर— बंधुआ मजदूर प्रथा भारत की ज्वलंत समस्याओं में से एक है। इस अर्द्ध-औपनिवेशिक एवं अर्द्ध-सामंती देश के खेतिहर गरीबों के नंगे शोषण और बर्बर दमन की झलक और अभिव्यक्ति इस प्रथा में दिखाई देती है। 1975 ई० में राष्ट्रपति के एक अध्यादेश के जरिए बंधुआ मजदूर प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन यह आज भी बिना किसी रोक-टोक के और भी तेजी से जारी है।


14. संविधान की सर्वोच्चता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर—संविधान की सर्वोच्चता संघीय शासन-व्यवस्था की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है। इसका आशय यह है कि संविधान लिखित, निश्चित तथा स्पष्ट हो। संविधान राज्य की सर्वोच्च विधि है, जिसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। केन्द्र और इकाइयों के बीच शक्तियों का विभाजन संविधान के द्वारा ही किया जाता है।


15. सत्ता का विभाजन क्यों आवश्यक है ?

उत्तर--- सत्ता का विभाजन इसलिए आवश्यक है क्योंकि इससे लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को हिस्सेदारी मिलती है। सभी समूह संतुष्टि महसूस करते हैं, विद्रोह की संभावना कम हो जाती है।


16. वर्ण-व्यवस्था क्या है ?

उत्तर- यह प्राचीन भारतीय सामाजिक व्यवस्था है जिसके अंतर्गत समाज को चार वर्णों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शुद्र में बाँटा गया है। इसमें ब्राह्मणों को सबसे ऊपर, इसके बाद क्षत्रिय एवं नीचे शुद्रों को रखा गया है।


17. पंचायत स्तर पर महिलाओं को कब और कितना आरक्षण प्राप्त होता है ?

उत्तर- पंचायत स्तर पर सन् 2006 में बिहार सरकार ने महिलाओं के लिए सीटों को आरक्षित किया। इसके अंतर्गत पचास प्रतिशत सीटों पर सिर्फ महिलाएँ ही चुनाव लड़ पाएँगी।

18. बेल्जियम में सामुदायिक सरकार का गठन किस प्रकार से किया गया है ?

उत्तर- यहाँ पर सामुदायिक सरकार का एक तीसरा स्तर था जो जर्मन,फ्रेंच या डच समुदायों के विशेष प्रतिनिधियों से ही बनता है और यह सामुदायिक विषयों पर ही फैसले लेती हैं, जैसे—भाषा, संस्कृति, शिक्षा इत्यादि।

19. श्रीलंका में तमिल क्यों असंतुष्ट थे ?

उत्तर- वर्ष 1956 में श्रीलंका की सरकार ने अपने संविधान का निर्माण किया। इसमें तमिलों को दरकिनार करते हुए ज्यादातर अधिकार सिंहलियों को दे दिया गया। तमिल श्रीलंका में उपेक्षित महसूस करने लगे जो आगे चलकर विद्रोह का कारण बना।


20. जातिवाद की समस्या क्या है ?

उत्तर- जातिवाद भारत की एक मुख्य सामाजिक समस्या माना जाता रहा है। जाति-व्यवस्था से ही समाज में ऊँच-नीच की भावना पैदा हुई। कर्म के आधार पर विकसित जाति-व्यवस्था जन्म के आधार को गले लगा ली जिसका समाज पर बुरा प्रभाव पड़ा। आज जातिवाद केवल सामाजिक समस्या ही नहीं राजनीतिक समस्या भी बन गई है, क्योंकि जाति और राजनीति दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करने लगी हैं। रजनी कोठारी ने इस संबंध में अपना विचार व्यक्त करते हुए सही कहा है कि आज हम जातिविहीन राजनीति की कल्पना नहीं कर सकते। उनका कहना सही है कि राजनीति में जातीयता का इतना प्रभाव हो गया है कि 'बेटी और वोट अपनी जाति को दो' का प्रचलन किया गया है।

21. परिवारवाद क्या है ?

उत्तर- अधिकांश राजनीतिक दल एवं उसके नेता अपने ही परिवार एवं सगे संबंधियों को राजनीति में लाने के लिए चुनाव के अवसर पर उम्मीदवार बनाते हैं। यही राजनीति में परिवारवाद है। हाल के दशकों में यह परंपरा बनी कि जिस जनप्रतिनिधि के निधन या इस्तीफे के कारण कोई सीट खाली हुई उसके किसी परिजन को चुनाव का टिकट दे दिया जाए।

22. नस्लवाद क्या है ?

उत्तर- जब किसी देश में नागरिकों के बीच नस्लों के आधार पर भेदभाव हो तब उसे नस्लवाद कहते हैं, जैसे—द० अफ्रीका में श्वेत एवं अश्वेतों के बीच भेदभाव।

23. गृहयुद्ध क्या है ?

उत्तर- जब देश के भीतर ही देश के लोगों के बीच संघर्ष एवं हिंसा शुरू हो जाती है तो इसे गृहयुद्ध का नाम दिया जाता है, जैसे श्रीलंका में तमिल एवं सिंहली समुदायों के बीच हुआ था।

24. मार्टिन लूथर किंग कौन थे ?

उत्तर- वे एक अश्वेत नेता थे जिन्होंने नस्लवाद के विरोध में लंबा संघर्ष किया था। बाद में इनकी हत्या हो गई थी।

25. सामाजिक विभेदों की राजनीति किस पर निर्भर करती है ?

उत्तर- स्वयं की पहचान, विभिन्न वर्गों के माँगों को राजनीतिक दलों द्वारा प्रस्तुत करने के तरीके एवं सरकार की इन माँगों के प्रति सोच।

26. भारत में किस तरह की जातिगत असमानताएँ हैं ? स्पष्ट करें।

उत्तर- भारतीय समाज की एक अनूठी विशेषता यह है कि भारतीय समाज में जाति आधारित विभाजन है। भारतीय समाज पूर्ण रूप से अगड़े और पिछड़े जातियों में विभाजित हो गए हैं। राजनीति की सत्ता की बागडोर आज भी उच्च जातियों के हाथों में है। प्रारंभ से ही वे सुविधा संपन्न रहे हैं। समाज में पिछड़े वर्ग खास तौर पर दलित जातियाँ सत्ता से पूर्णरूपेण वंचित रही है।
सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक स्तर पर जातिगत असमानताएँ जारी हैं। सरकार विभिन्न आर्थिक एवं राजनीतिक योजनाओं के अंतर्गत इन असमानताओं को दूर करने का प्रयास कर रही है।

27. वंशवाद से क्या समझते हैं ?

उत्तर- भारत के सभी राजनीतिक दलों में नेतृत्व का संकट है। अधिकांश राजनीतिक दलों में कोई ऐसा नेता नहीं है, जो सर्वमान्य हो। प्रायः सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को यह देखा गया है कि शीर्ष पर बैठे नेता अपने संगे-संबंधियों, दोस्तों और रिश्तेदारों को दल के प्रमुख पदों पर बैठाते हैं और यह सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी कायम रहता है। वंशवाद की समाप्ति राजनीतिक दलों के सामने प्रमुख चुनौती है।

28. धर्म निरपेक्ष राज्य से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- (i) धर्म निरपेक्ष राज्य किसी भी धर्म को राजकीय धर्म घोषित नहीं करेगा और न ही किसी धर्म को विशेष दर्जा देगा।
(ii) धर्म निरपेक्षता के अंतर्गत संविधान सभी नागरिकों को किसी भी धर्म का पालन करने एवं उसका प्रचार करने की आजादी देता है। ये दोनों प्रावधानों से स्पष्ट है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है।



29. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- सत्ता की साझेदारी का अर्थ है, सरकार के विभिन्न अंगों जैसे— कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा। सत्ता की साझेदारी सरकार के विभिन्न स्तरों जैसे संघ, राज्य और स्थानीय स्वशासन के बीच सत्ता का बँटवारा। इसमें प्रत्येक स्तर की सरकार अपने क्षेत्र में स्वायत्त होती है और अपने-अपने कार्यों के लिए लोगों के प्रति जवाबदेह या उत्तरदायी होती है।

30. लोकतंत्र जनता की सरकार है, कैसे ?

उत्तर - लोकतंत्र में जनता स्वयं अपनी प्रतिनिधि का चुनाव करती है और यही प्रतिनिधि सरकार का गठन करते हैं। अत: यह जनता का ही सरकार है।

31. गठबंधन सरकारों के दो उदाहरण दें।

उत्तर - केन्द्र में भाजपा एवं सहयोगी दलों का एन० डी० ए० अर्थात् राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन एवं पंजाब राज्य में एन० डी० ए० एवं अकाली दल अर्थात् राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन इसके दो उदाहरण हैं।

32. श्रीलंका में गृहयुद्ध का क्या कारण था ?

उत्तर- श्रीलंका की सरकार ने स्वतंत्रता के बाद जो भी कानून बनाये, उसमें सत्ताधारी सिंहली समुदाय ने तमिल समुदाय के हितों की निरंतर उपेक्षा की, जिसके परिणामस्वरूप तमिलों तथा सिंहलियों के बीच के टकराव ने गृहयुद्ध का रूप ले लिया।

33. भारत को गणतंत्र क्यों कहा जाता है ?

उत्तर :- प्रस्तावना में भारत को गणतंत्र घोषित किया गया है। इस बात को स्पष्ट किया गया है कि देश में किसी वंशगत राजा का शासन नहीं होगा। संविधान यह व्यवस्था करता है कि देश का शासक राष्ट्रपति होगा, जो जनता द्वारा निश्चित अवधि
के लिए चुना जाएगा l

34. स्थानीय स्वशासन में किस स्तर की शासन-व्यवस्था है ?

उत्तर—यह शासन की सबसे निचली सीढी है जो ग्रामीण स्तर पर पंचायती राज एवं शहरी क्षेत्र में नगरपालिका के नाम से जानी जाती है।

35. भारतीय संविधान के दो प्रावधानों का वर्णन करें जो भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य बनाते हैं।

उत्तर (i) भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सांविधानिक संशोधन द्वारा भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है।
(ii) संविधान में इस बात का स्पष्ट उल्लेख कर दिया गया है कि भारत का अपना कोई धर्म नहीं है।

36. बिहार में पंचायती राज व्यवस्था किस प्रकार की है ?

उत्तर—यहाँ तीन स्तर पर पंचायती राज व्यवस्था है—(क) ग्राम पंचायत, (ख) पंचायत समिति एवं (ग) जिला परिषद्।

37. भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत कब और कहाँ हुई ?

उत्तर - भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत सन् 1959 में राजस्थान के नागौर जिले से हुई थी।


38. संघात्मक शासन-व्यवस्था क्या है ?

उत्तर- जब संपूर्ण देश का शासन एक केंद्र से नहीं चलाकर इकाइयों की सरकारों द्वारा चलाया जाता है तब उसे संघात्मक शासन-व्यवस्था कहते हैं।

39. भारतीय संविधान में दी गई तीनों सूचियों के नाम बताएँ।

उत्तर :- भारतीय संविधान में तीन सूचियाँ हैं—संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची।

40. संघ राज्य का अर्थ बताएँ।

उत्तर - संघ राज्य का तात्पर्य वैसे राज्य से है जिसमें सत्ता की दो शक्तियों का प्रांतीय राज्यों में विकेन्द्रीकरण होता है। ऐसे राज्य का गठन दो तरीके से होता है। पहला जब कई स्वतंत्र और सम्प्रभु राज्य आपस में मिलकर सामान्य सम्प्रभुता को स्वीकार कर एक संघीय राज्य का गठन करते हैं; जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका। . । दूसरा, किसी बड़े राज्य का अनेक राजनैतिक इकाइयों या प्रान्तों में बाँटकर सत्ता की शक्तियों का विकेन्द्रीकरण किया जाता है, जैसे भारत।
संघ राज्य में दो प्रकार की सरकारें होती हैं केन्द्रीय या संघीय तथा स्थानीय या प्रान्तीय। दोनों सरकारों के बीच शासन के विषयों का बँटवारा कर दिया जाता है।

41. ग्राम सभा क्या है ?

उत्तर- ग्राम सभा—यह पंचायत की व्यवस्थापिका सभा है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में रहनेवाले सभी वयस्क स्त्री-पुरुष जो 18 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, ग्रामसभा के सदस्य होते हैं। ग्रामसभा की बैठक वर्ष भर में कम-से-कम चार बार होती है। मुखिया ग्रामसभा की बैठक बुलाता है और इसकी अध्यक्षता करता है।


42. ग्राम रक्षा दल क्या है ?

उत्तर—ग्राम रक्षा दल ग्राम पंचायत का प्रमुख अंग है। इसे गाँव की पुलिस व्यवस्था कहा जाता है। गाँव के 18 से 30 वर्ष की आयु वाले स्वस्थ युवक ग्राम रक्षा दल के सदस्य होते हैं। ग्राम रक्षा दल का प्रधान दलपति होता है जिसकी नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है। इसका मुख्य काम रात्रि में पहरा देना, बाढ़, अकाल जैसी आकस्मिक घटनाओं का डटकर सामना करना है।

43. भारत में किस प्रकार का भाषा नीति है? स्पष्ट करें।

उत्तर - भारत में एक ऐसी भाषा नीति तैयार की गई है जो अधिकतर भारतीय जनसंख्या को शामिल कर सके।
भारतीय संविधान में कुल 22 भाषाओं को स्थान प्रदान किया गया है। इन सभी भाषाओं को समान रूप से संवर्धन एवं संरक्षण प्रदान किया गया है। हिंदी, जो कि भारत के 40% से भी अधिक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती है उसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया है। इस प्रकार भारत सरकार ने एक सर्वोत्तम भाषा-नीति अपनाई है।


44. दल बदल कानून क्या हैं ?

उत्तर- जब कोई व्यक्ति या जनप्रतिनिधि किसी दल विशेष के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े और चुनाव जीत जाने के पश्चात् उस दल को त्यागकर किसी दूसरे दल की सदस्यता ग्रहण कर ले तो इसे दल-बदल कहा जाता है। आए दिन दल-बदल के कारण सरकारें गिरती रही हैं। दल-बदल की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए दल-बदल कानून लागू किया गया है। नए दल-बदल कानून के अनुसार अब विधायकों या सांसदों को अपनी सीटें गँवानी पड़ सकती है। इस सदस्यों का दल-बदल रोकने के लिए 1985 एवं 2003 में संविधान में संशोधन कर दल-बदल कानून बनाया गया।


45. स्थानीय स्वशासन के महत्त्व का उल्लेख करें।

उत्तर- स्थानीय स्वशासन का आशय ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें स्थानीय क्षेत्रों का शासन वहाँ की जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होता है। लोकतंत्र की यह मूल मान्यता है कि शासन के कार्यों में जनता के अधिक से अधिक भागीदारी हो। इस मान्यता को व्यावहारिक रूप स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं द्वारा ही प्रदान किया जाता है। इससे जनता को लोकतांत्रिक जीवन पद्धति अपनाने का आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त होता है। स्थानीय संस्थाएँ जनसहयोग के उत्कृष्ठ साधन हैं। स्थानीय शासन के कारण सरकार का कार्यभार हल्का हो जाता है। इस तरह, यह स्पष्ट है कि स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ लोकतंत्र की प्राथमिक पाठशाला और आदर्श जीवन की आधारशिला है।

46. वार्ड-पार्षद के क्या कार्य हैं ?

उत्तर- वार्ड-पार्षद के कार्य (i) वार्ड की सड़कों, गलियों, नालियों की नियमित सफाई। (ii) सड़कों, गलियों आदि सार्वजनिक स्थानों पर बिजली की व्यवस्था (i) वार्ड की जनवितरण प्रणाली को दुरूस्त तथा उसका निगरानी करना। (iv) निर्मल पेय-जल की आपूर्ति उपलब्ध कराना।












Comments

Popular posts from this blog

पाठ -2 उसने कहा था 12th

ढहते विश्वास’

महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न हिंदी 10th