Geography Long Ans Type questions


Geography Long Ans Type questions
1. संसाधन से क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

उत्तर :- वातावरण में पाये जाने वाले वे सभी पदार्थ जो हमें उपलब्ध है और जो हमारे जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरी करे संसाधन कहलाते हैं। परंत वे संसाधन तभी कहे जायेंगे जब हमें उन तक पहुँचने की तकनीक की जानकारी हो साथ ही उनके प्राप्त करने, उपयोग करने पर होने वाले खर्च वहन करने की क्षमता हो, श्रम शक्ति हो। परंतु इसके उपयोग में व्यापक समझ और सूझबूझ की आवश्यकता होती है जिससे वातावरण प्रभावित न हो और प्रकृति के साथ सामंजस्य बना रहे तभी प्रकृति के सभी पदार्थ संसाधन कहे जाते हैं।
उदाहरणस्वरूप छोटानागपुर पठार के खनिज भंडार का युगों तक कोई महत्त्व न था। अतः वे खनिज पदार्थ संसाधन न बन सके। परंतु जब खनिजों का महत्त्व समझा जाने लगा और लोगों ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन कर उनको निकालना आरंभ किया तथा उपयोग में लाया गया तो वे खनिज पदार्थ खनिज संसाधन बन गये। जिसने छोटानागपुर क्षेत्र की आर्थिक विकास का अवसर प्रदान किया।


2. 'संसाधन हुआ नहीं करते, बना करते हैं। इस कथन की व्याख्या करें।

उत्तर :- संसार में अनकों प्राकृतिक पदार्थ बिखरे पड़े हैं जब तक उनका उपयोग नहीं किया जाता है वे संसाधन नहीं बन पाते।
मनुष्य उन्हें पता लगाता है, फिर अपनी बुद्धि, विवेक, क्षमता, तकनीक और कुशलता का प्रयोग कर अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए, आर्थिक विकास के लिए उनके उपयोग की योजना बनाता है और उपयोग में लाकर वह उन्हें संसाधन बनाता है। मनुष्य के आर्थिक विकास के लिए संसाधन अति आवश्यक होता है। नदियाँ तभी संसाधन बन पाती हैं जब मानव उनका उपयोग सिंचाई में, जल विद्युत उत्पादन में, मत्स्यपालन में एवं जलीय यातायात के रूप में और अनेक आर्थिक कार्यों में न किया जाय। सदियों से शोक का कारण बनने वाली नदी, विनाशकारी बाढ़ लाने वाली नदी, हजारों हजार की संख्या में जान माल का क्षति पहुँचाने वाली नदी पर योजना बनाकर बाँध बनाया गया, नहरें निकाली गयी, सिंचाई का काम लिया, विद्युत उत्पादन किए गये जिससे सिंचाई और उद्योग के विकास में मदद मिलने लगी तो वही शोक पैदा करने वाली नदी प्राकृतिक संसाधन बन गई, खुशहाली का कारण बनी। इसीलिए एक भूगोलवेत्ता जिम्मरमैन ने ठीक ही कहा है कि संसाधन हुआ नहीं करते, बना करते हैं।

3. ऊर्जा संसाधन के महत्त्व पर प्रकाश डालें।

उत्तर :- शक्ति के साधन को ऊर्जा संसाधन भी कहा जाता है। ऊर्जा आधुनिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। ये आर्थिक क्रियाओं के लिए अनिवार्य हो गई है। किसी भी देश के औद्योगिक, कृषि, यातायात के विकास के लिए ऊर्जा अथवा शक्ति के साधनों की आवश्यकता होती है। शक्ति के साधन ही आधुनिक युग में आधार माना जाता है। आर्थिक विकास का सूचक होता है। अतः जिन संसाधनों का प्रयोग करके हम मशीनों को चलाते हैं, यातायात के साधनों को गति प्रदान करते हैं, कृषि को यांत्रिक बनाते हैं, घरेलू कार्यों में उपयोग करते हैं, उन्हें ऊर्जा संसाधन कहा जाता है। इसके अभाव में आर्थिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।

4. भूमि किस प्रकार महत्त्वपूर्ण संसाधन है ?

उत्तर :- हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमि एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। आवास बनाने के लिए यातायात के साधन के लिए, कृषि के लिए, पशुपालन के लिए चारागाह, खनिज क्षेत्र, उद्योग क्षेत्र, व्यापार केंद्र, शिक्षा के लिए विद्यालय, महाविद्यालय, स्वास्थ्य के लिए हॉस्पिटल आदि कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। भूमि की प्रकृति हमारे क्रियाकलापों को प्रभावित करती है। पठारी भूमि खनिजों से भरी होती है तो यहाँ खनन कार्य किया जाता है। खनिजों पर आधारित उद्योग स्थापित किए जाते हैं। समतल मैदानी भाग में वर्षा जल या सिंचाई की सुविधा होने पर अच्छी फसल उत्पादन किया जाता है। पहाड़ी भागों से वन उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं और सीढ़ीनुमा खेत बनाकर उत्पादन लिया जाता है। इस प्रकार भूमि महत्त्वपूर्ण संसाधन है।


5. मानव के लिए संसाधन क्यों आवश्यक है ?

उत्तर :- प्रकृति प्रदत्त वस्तुएँ हवा, पानी, वन, वन्य जीव, भूमि, मिट्री, खनिज संपदा एवं शक्ति के साधन या स्वयं मनुष्य द्वारा निर्मित संसाधन के बिना मनुष्य की जरूरतें पूरी नहीं हो सकती हैं तथा सुख सुविधा नहीं मिल सकती है। मनष्य का आर्थिक विकास संसाधनों की उपलब्धि पर ही निर्भर करता है। संसाधनों का महत्त्व इस बात से लगता है कि इनकी प्राप्ति के लिए मनुष्य कठिन से कठिन परिश्रम करता है, साहसिक यात्राएँ करता है, फिर अपनी बुद्धि, प्रतिभा, क्षमता, तकनीकी ज्ञान और कशलताओं का प्रयोग करके उनके उपयोग की योजना बनाता है. उन्हें उपयोग में लाकर अपना आर्थिक विकास करता है। इसलिए मनुष्य के लिए संसाधन बहुत . आवश्यक है। इसके बिना मनुष्य का जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता है।


6. वन को 'अनुपम संसाधन' क्यों कहा गया है ?

उत्तर :- वन राष्ट्रीय संपत्ति है। एक महत्त्वपूर्ण नवीकरणीय संसाधन है। इससे तापमान में कमी और वर्षा की मात्रा में वृद्धि होती है। जिससे जलवायु अनुकूल बनी रहती है। वनों से भूमि कटाव कम होता है और नदियों में जल प्रवाह सामान्य बना रहता है। पशु पक्षियों के लिए आवास, चारा और प्राकृतिक वातावरण प्राप्त होता है। वनों से ईंधन, इमारती लकड़ियों के अतिरिक्त उद्योगों के लिए कच्चा माल की प्राप्ति होती है। वन से हमें फल-फल, कंद-मूल तथा औषधियों की प्राप्ति होती है। जीवन में वनों से अनेकों प्रकार के लाभ उठाते हैं। इसलिए वन को 'अनुपम संसाधन' कहा गया है।


7. भारत के प्रमुख तीन धात्विक खनिजों का विवरण बताएँ।

उत्तर :- धात्विक खनिज ऐसे खनिज होते हैं जिन्हें शुद्ध करने के बाद इच्छित रूप में ढाला जाता है। धात्विक खनिज को लौह तथा अलौह खनिजों में बाँटा जाता है। प्रमुख धात्विक खनिजों में लोहा, मैंगनीज, बॉक्साइट और ताँबा है। इनका विवरण इस प्रकार हैं -
(i) लौह अयस्क भारत में लौह अयस्क का संचित भंडार बहुत अधिक है। यहाँ उच्च कोटि के हेमाटाइट और मैंग्नेटाइट लौह अयस्क पाये जाते हैं।
भारत का सर्वप्रमुख लौह क्षेत्र झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गोवा इत्यादि राज्यों में है।
(ii) मैंगनीज अयस्क भारत में मैंगनीज का भंडार विश्व के भंडार का 20% पाया जाता है। इस खनिज के प्रमुख भंडार उड़ीसा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट और गोवा राज्य में हैं। भारत का मैंगनीज उच्च कोटि का है, यह धात्विक खनिज जो इस्पात बनाने में काम आता है।
(iii) बॉक्साइट अयस्क-एक अनुमान के अनुसार भारत में बॉक्साइट का विशाल भंडार है। इस खनिज से एलुमिनियम निकाला जाता है। भारत में इसके भंडार झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक राज्य में पाये
जाते हैं।


8. नदी घाटी परियोजनाओं को बहउद्देशीय परियोजना क्यों कहा जाता है ?

उत्तर :- निम्नलिखित कारणों से नदी घाटी परियोजनाओं को बहुउद्देशीय परियोजना कहा जाता है—
(i) सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में नदी के जल को नियंत्रित करके खेतों की सिंचाई की जाती है।
(ii) नदियों पर बाँध बनाकर बाढ़ की विभीषिका से लोगों को बचाया जाता है।
(iii) नदी-घाटी योजनाओं से जलं-विद्युत उत्पन्न किया जाता है।
(iv) जलाशयों में मछली पालन को वृहत रूप से विकसित किया जाता है।
(v) नदी के संचित जल को कारखानों में उपयोग किया जाता है।
(vi) जल को शुद्ध कर पाइपों द्वारा शहरों में लाया जाता है और उसका दैनिक उपयोग किया जाता है।
(vii) गहरे जल में नाव चलाए जाते हैं जो यातायात एवं माल ढोने में सहयोग १० देता है।
(viii) नदी में बाँध बनाकर नहरें निकाली जाती हैं। उसके दोनों किनारे पर उपयोगी वृक्षों को लगाया जाता है और भूमि पर पशुचारण के लिए उपयोग किया जाता है।


9. जैव विविधता क्या है? यह मानव के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं ? विस्तार से लिखें।


उत्तर :- किसी विशेष क्षेत्र में उपस्थित एक सामुदायिक जातियों की संख्या एवं जातियों के अंतर्गत आनुवंशिक परिवर्तनशीलता की मात्रा उस क्षेत्र के समुदाय की जैव विविधता कहलाती है। जैव विविधता मानव के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यह नई फसलों, औषधियों को प्राप्त करने का स्रोत है। बढ़ती हुई जनसंख्या के पेट भरने के लिए एवं स्वस्थ रहने के लिए इन फसलों एवं औषधियों का महत्त्व और भी अधिक है। इससे मानवीय विकास को गति प्रदान होती है। पर्यावरणीय परिवर्तन का सामना करने में जैव विविधता महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। यह वर्तमान समय में सभी जातियों की आनुवंशिक विविधताओं को संरक्षित रखने में सहायक होता है।
इस प्रकार मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित तथा विकासशील रखने में जैव विविधता को अक्षुण बनाए रखना मानव के लिए महत्त्वपूर्ण है।


10. जल संरक्षण से क्या समझते हैं? इसके क्या उपाय हैं ?
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उत्तर—मानव को प्रकृति से अनेक उपहार मिले हैं जिससे मानवीय जीवन की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं, इसलिए इनका संरक्षण आवश्यक है। इन संसाधनों में जल एक ऐसा संसाधन है जिसका फैलाव पृथ्वी के दो-तिहाई भाग पर पाया जाता है। परंतु उपयोगी जल बहुत कम है। इसलिए इसके उचित प्रबंधन एवं संरक्षण की आवश्यकता है, ताकि जल संकट दूर हो सके। जल संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर लगातार प्रयास जारी है। भारत सरकार ने 1987 ई० में राष्ट्रीय जल नीति बनायी थी जिसे 2002 में पुनः संशोधित कर लागू किया गया।
जल संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं -
(i) भूमिगत जल की पुनर्पूर्ति— भूमिगत जल के स्तर में लगातार हो रहे गिरावट को नियंत्रित करने के लिए वृक्षारोपन, जैविक व कंपोस्ट का
उपयोग, वेटलैंडस का संरक्षण, वर्षा जल का संचयन जैसे कार्यक्रम को - चलाना उपयोगी सिद्ध होगा।
(ii) जल संभर प्रबंधन—जल प्रवाह या जल जमाव का उपयोग कर उद्यान, कृषि वानिकी, जल कृषि, कृषि उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है इससे पेयजल की आपूर्ति भी की जा सकती है। तकनीकी विकास-तकनीकी के माध्यम से जल को कम-से-कम उपयोग कर अधिकाधिक लाभ लेकर भी जल संरक्षण किया जा सकता है। ड्रिप सिंचाई-लिफ्टसिंचाई, सूक्ष्म फुहारों द्वारा सिंचाई, सीढ़ीनुमा खेती से जल का संरक्षण किया जा सकता है।

11. बायोगैस ऊर्जा पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर—भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ बड़े पैमाने पर पशुओं को पाला जाता है। उनके गोबर, मल-मूत्र, गन्ना की खोई, धान की भूसी, कृषि के कूड़े-कचड़े, वृक्षों की झाड़ियाँ, घास-फूस से हजारों मेगावाट विद्युत उत्पन्न किया जा सकता है। गोबर गैस संयंत्र लगाकर ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस का उत्पादन भी किया जा रहा है। बड़े नगरों में भी बायोगैस संयंत्र लगाकर जरूरत पूरी की जाती है। जैसे दिल्ली नगर के ओखला में इस प्रकार का कार्य किया जा रहा है। इस गैस की तापीय क्षमता मिट्टी के तेल, उपला और लकड़ी के कोयले की तापीय क्षमता से अधिक होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस का उपयोग खाना पकाने, घरों में रोशनी करने एवं सिंचाई करने में किया जाता है, शहरी क्षेत्रों में भी सड़कों की रोशनी के लिए बायोगैस का प्रयोग किया जा रहा है।


12. गोंडवाना काल के कोयले का भारत में वितरण पर प्रकाश डालें।

उत्तर :- भारत में 98% कोयला गोंडवाना समूह के पाये जाते हैं। इस समूह का कोयला सबसे अधिक झारखण्ड राज्य में झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा, रामगढ़ में संचित है। दूसरा बड़ा संचित भंडार उड़ीसा में है। यहाँ तालचर में कोयला का सबसे बड़ा भंडार है। महाराष्ट्र में 7% कोयला का भंडार पाया जाता है। जहाँ वर्धा, कापटि तथा बंदेर प्रमुख कोयला खदान है। मध्यप्रदेश में 7% कोयला का संचित भंडार है जो सिंगरौली, सोहागपुर, जोहिल्ला, उमरिया एवं सतपुड़ा क्षेत्र में कोयला की खाने हैं। छत्तीसगढ़ में 15% कोयला का भंडार संचित है। चिरिमिरी, कुरसिया, विश्रामपुर, झिलमिली, सोनहाट, लखनपुर में कोयला का खदान है। । पश्चिमी बंगाल में रानीगंज, दार्जिलिंग प्रमुख कोयला के क्षेत्र है।






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