Disaster Management Long Ans Type Questions


Disaster Management Long Ans Type Questions
1. बाढ़ से होनेवाली हानियों की चर्चा करें।

उत्तर- बाढ़ से होनेवाली हानियों में शामिल हैं।
(i) अपार धन-जन की हानि,
(ii) फसलों की बर्बादी,
(iii) महामारी फैलना,
(iv) परिवहन व्यवस्था का ठप पड़ जाना,
(v) वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं की क्षति

2. बाढ़ से बचाव के सुझावों को लिखें।

उत्तर- (i) हाथों से स्ट्रैचर बनाना— इसे दो व्यक्ति एक-दूसरे की कलाई पकड़कर अस्थायी स्ट्रैचर बना लेते हैं।
(ii) ऊपरी कपड़ों द्वारा स्ट्रैचर बनाना—कमीज आदि का प्रयोग कर कपड़ों के दोनों तरफ डंडे डाल कर स्ट्रैचर बनाकर घायल व्यक्ति को उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।
(iii) तैरने के लिए पीपों का प्रयोग किया जाता है।
(iv) ट्यूब में हवा भरकर भी तैरने के लिए प्रयोग होता है।
(v) केले के पेड़ के तनों का प्रयोग भी बचाव के लिए किया जाता है।

3. भूकंप क्या है? इसके बचाव के किन्हीं दो उपायों का उल्लेख करे l

उत्तर—जब किसी बाहरी या आंतरिक कारणों से पृथ्वी के भूपटल में कंपन उत्पन्न होता है, तो उसे भूकंप कहते हैं। इसके बचाव के निम्न उपाय हैं -
(i) भूकंप रोधी मकानों का निर्माण करना।
(ii) इससे सुरक्षा के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना।

4. भूकंप केंद्र और अभिकेंद्र में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर— पृथ्वी की ऊपरी सतह का अचानक काँपना भूकंप कहलाता है। भूकंप का उद्गम पृथ्वी की गहराई में स्थित एक बिंदु से होता है उस स्थान को ही भूकंप केंद्र कहते हैं। भूकंप केंद्र अधिक गहराई में उत्पन्न होने पर उसका प्रभाव कम होता है। भूकंप केंद्र से उठने वाली तरंगें समकोण पर चलकर धरातल के जिस भाग पर सर्वप्रथम पहुँचती हैं, धरातल के उस भाग को अभिकेंद्र कहा जाता है। अभिकेंद्र पर भूकंप की तरंगों का प्रभाव अधिक मिलता है। अभिकेंद्र से जैसे-जैसे दूरी बढ़ती जाती है प्रभाव कम होता जाता है।

5. भूकंपीय तरंगें क्या है? इनके नाम लिखें।

उत्तर- भूगर्भ में पैदा होने वाले हलचल से तरंगे उत्पन्न होती हैं, यह दो प्रकार की होती है। एक सेकंड में 8 किलोमीटर तक दूरी तय करने वाली तरंगें प्राथमिक तथा धीमी गति से चलने वाली तरंगे द्वितीयक तरंगें कहलाती हैं। द्वितीयक तरंग से अधिक क्षति पहुँचती है। पृथ्वी तल पर पहुँचने वाली तरंगें तल तरंगों में बदल जाती है। इन्हें रैले और लव तरंगें कहते हैं। इनकी तरंग लंबाई बहुत अधिक होती है। ये अत्यधिक घातक होती हैं। इन्हीं के कारण पृथ्वी तल पर कंपन्न होता है और मकान गिरने लगते हैं। द्वितीयक तरंग से चट्टाने टूटती फूटती हैं। इसके झटके बाद में भी आते रह सकते हैं।

6. भूकंप का अधिकतम प्रभाव क्षेत्र कौन-सा है ?

उत्तर - यह भूकंप तीव्रता की दृष्टि से 9 से अधिक तीव्रता वाला क्षेत्र है। इसमें भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य, बिहार एवं नेपाल की सीमावर्ती क्षेत्र तथा गुजरात का कच्छ प्रदेश शामिल है। इसे जोन V में रखा गया है।

7. भूकंप क्या है? भारत के प्रमुख भूकंप क्षेत्रों में विभाजित करते हुए सभी क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण दें। अथवा, भारत के भूकम्पीय पेटी का सोदाहरण वर्गीकरण करें।

उत्तर— पृथ्वी के आंतरिक भागों में अचानक उत्पन्न कंपन को भूकंप कहते हैं। भूकंप की तीव्रता को सिस्मोग्राफ यंत्र द्वारा रिक्टर स्केल में मापते हैं।
भारत को निम्नांकित भूकंप क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है...
(क) जोन-I—इसके अंतर्गत भारत के दक्षिणी पठारी भाग आता है जहाँ भूकंप का खतरा नहीं के बराबर है।
(ख) जोन-II-इसके अंतर्गत प्रायद्वीपीय भारत के तटीय मैदानी क्षेत्र आते हैं जहाँ भूकंप की तीव्रता कम होती है।
(ग) जोन-III-इसके अंतर्गत मुख्यतः गंगा सिंधु का मैदान, राजस्थान तथा उत्तरी गुजरात के क्षेत्र आते हैं।
(घ) जोन-IV—इसके अंतर्गत शिवालिक हिमालय का क्षेत्र, पश्चिम बंगाल का उत्तरी भाग, असम घाटी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र, अंडमान निकोबार द्वीप समूह यह सब क्षेत्र भूकंप के अधिक खतरनाक क्षेत्रों में आते हैं।
(ङ) जोन-V_इसके अंतर्गत गुजरात का कच्छ प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के पर्वतीय भाग, सिक्किम राज्य सम्मिलित हैं जो भूकंप के सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्र माने जाते हैं।


8. भूकम्प एवं सुनामी के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपायों का वर्णन करें।

उत्तर-भूकम्प एवं सुनामी एक प्राकृतिक आपदा है, जो काफी विनाशकारी होता है। भूकम्प से बचाव के भिन्न तरीके हैं -
(i) भूकम्प का सटीक पूर्वानुमान लगाया जाना चाहिए।
(ii) भूकम्पनिरोधी मकान बनाया जाना चाहिए।
(iii) जनता को जागरूक बनाया जाना चाहिए।
(iv) विद्यालय में बच्चों को भूकम्प की जानकारी दी जानी चाहिए।

सुनामी से बचने के भिन्न तरीके हैं -
(i) समुद्र के नजदीक तटबंधों का निर्माण किया जाना चाहिए।
(ii) तटबंध के किनारे मैंग्रोव वनस्पति लगाया जाना चाहिए।
(iii) तटीय क्षेत्रों के नजदीक रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
(iv) सुनामी से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मदद पहुँचाना चाहिए।

9. आग लगने की स्थिति में क्या प्रबंधन करना चाहिए? उल्लेख करें।

उत्तर आग लगने की स्थिति में निम्न प्रबंधन की आवश्यकता होती है -
(i) आग पर सर्वप्रथम नियंत्रण करना,
(ii) आग में फंसे हुए लोगों एवं मवेशियों को बाहर निकालना,
(iii) आग से प्रभावित लोगों को तत्काल उपचार की व्यवस्था करना, (iv) आग के दौरान छत पर फंसे लोगों को सीढ़ी द्वारा उतारने का कार्य किया
जाना

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