Geography Short Ans Type Questions


Geography Short Ans Type Questions
1. जल संसाधन के क्या उपयोग हैं ?

उत्तर - जल एक बहुमूल्य संसाधन है, जिसका उपयोग मानव प्राचीन समय से ही करता आ रहा है। प्राचीन काल से ही मानव द्वारा पेयजल, घरेलू कार्य, सिंचाई, मल-मूत्र विसर्जन आदि कार्यों में जल का उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान समय में जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई, विद्युत उत्पादन एवं उद्योगों में किया जा रहा है।

2. खनिजों के आर्थिक महत्त्व का वर्णन करें।

उत्तर-खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है, जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना है। हमारे जीवन में खनिजों का विशेष आर्थिक महत्त्व है। औद्योगिक उत्पादन के लिए खनिज एक आधारभूत जरूरत होती है। इसके अभाव में न तो किसी उद्योग एवं न किसी राष्ट्र के विकास की कल्पना की जा सकती है।

3. पेट्रोलियम से किन-किन वस्तुओं का निर्माण होता है ?

उत्तर- पेट्रोलियम एक शक्ति संसाधन है, जिसका हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है। इसका मुख्य उपयोग यातायात के साधनों में ईंधन के रूप में है। इसके अलावा औद्योगिक मशीनों में स्नेहक के रूप में होता है। पेट्रोलियम का उपयोग संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक, रसायन उद्योग, कीटनाशक दवा एवं कृत्रिम रबर बनाने में भी किया जाता है।

4. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है ?

उत्तर---प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि ये हमारे लिए बहुमूल्य हैं एवं इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं।

5. जलोढ़ मृदा से क्या समझते हैं? इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें उगाई जा सकती है ?

उत्तर - वैसी मिट्टी जिसका निर्माण नदियों द्वारा लाए गये तलछट के निक्षेप से होता है, जलोढ़ मृदा कहलाती है। इस मिट्टी में पोटाश एवं चूने की अधिकता होती है तथा नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की कमी होती है। यह मिट्टी धान, गेहूँ, गन्ना एवं दलहन के लिए काफी उपयोगी है। इसके साथ ही इस मिट्टी में आलू. एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ भी काफी मात्रा में उत्पादित किये जाते हैं।

6. संसाधन क्या होते हैं ?

उत्तर - हमारे पर्यावरण में पाई जाने वाली प्रत्येक वस्तु जो हमारी जरूरतों को पूरा कर सकती है, संसाधन कहलाती है। शर्त यह है कि वस्तु तकनीकी रूप से सुगम, आर्थिक रूप से उपयोगी तथा सांस्कृतिक रूप से मान्य हो। जैसे-भूमि, मृदा, जल, खनिज, जीव इत्यादि।

7. वन्य जीवों के ह्रास के चार प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- वन्य जीवों के ह्रास के निम्न चार प्रमुख कारक हैं-
(i) वन्य प्रदेश के कटने के कारण वन्य जीवों का आवास कम होता जाना।
(ii) वन्य जीवों का लगातार शिकार किया जाना।
(iii) कृषि में अनेक रसायनों के प्रयोग ने भी कई वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न कर दिया है।
(iv) प्रदूषण के कारण भी वन एवं वन्य प्राणियों का ह्रास हुआ है।


8.15. भारत में कोयला उत्खनन कब प्रारंभ हुआ ?

उत्तर-भारत में कोयला उत्खनन 1774 में प्रारंभ हुआ, परंतु व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन 1839 ई० से हो रहा है। स्वतंत्रता के बाद कोयले के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। अभी भारत का स्थान विश्व के कोयला उत्पादक देशों में 8वाँ है।

9. ऐलुमिनियम के उपयोग का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-(i) वायुयान निर्माण में, (ii) विद्युत उपकरण के निर्माण में, (iii) घरेलू साज-सज्जा के साधनों के निर्माण में, (iv) बर्तन बनाने में, (v) सफेद सीमेंट तथा रासायनिक वस्तुएँ बनाने में।

10. सौर ऊर्जा का उत्पादन कैसे होता है ?

उत्तर :- सूर्य से आनेवाली किरणें जब फोटोवोल्टाइक सेलों पर पड़ती हैं तब सूर्य किरणें ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती हैं जिसे सौर ऊर्जा कहा जाता है। कम लागत में अधिक ऊर्जा प्राप्त करने का एक अनोखा साधन है। भारत के पश्चिमी भाग गुजरात और राजस्थान में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं।

11. भारत में नदियों के प्रदूषण के कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- भारत में प्रायः नगर एवं कल-कारखाने नदियों के किनारे अवस्थित हैं। इन नगरों के गंदे जल और कल कारखानों के कचड़ों को प्रायः नदियों में ही गिरा दिया जाता है। साथ ही कृषि में उपयोग किए जाने वाले रसायनों उर्वरकों, कीटनाशकों के जल में मिल जाने के कारण भी नदियों का जल प्रदूषित हुआ है।


12. बॉक्साइट किस तरह एक उपयोगी खनिज है ? इसकी प्राप्ति किन चट्टानों से होती है ? झारखण्ड के किन जिलों में इसकी विकसित
खाने हैं ?

उत्तर :- बॉक्साइट से अल्युमिनियम निकाला जाता है। जिसका उपयोग वायुयान बनाने, बिजली का तार बनाने तथा बरतन में किया जाता है। इसका उपयोग सीमेंट बनाने और खनिज तेल साफ करने में भी किया जाने लगा है।
बॉक्साइट की प्राप्ति लैटेराइट चट्टान से होती है। बॉक्साइट का बड़ा भंडार झारखंड के पलामू और लोहरदगा जिले में पाया जाता है जहाँ से निकालकर रेलमार्ग द्वारा मूरी पहुँचाया जाता है। यहाँ की खाने विकसित हैं। भारत बॉक्साइट का निर्यात जापान, ब्रिटेन और जर्मनी को करता है।


13. वन का पर्यावरणीय महत्त्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर- वन प्रकृति का अनुपम उपहार है, जिसके आँचल में मानव आदिकाल से पोषित होता रहा है। वन जलवायु का सच्चा मानक है। एक तरफ वन की भूमि जल का अवशोषण कर बाढ के खतरे को रोकती है तो दूसरी तरफ अच्छी वर्षा भी कराती है। यह वन्य प्राणियों को भी आश्रय प्रदान करती है तथा वन्य प्राणियों के साथ ही मानव को भी अनेक आवश्यक जीवनदायिनी वस्तुएँ देती हैं। जीव मंडल में जीवों और जलवायु को संतुलित स्थिति प्रदान कर संतुलित पारिस्थितिकी तत्र क निर्माण में सर्वाधिक योगदान देता है।

14. भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्त्व है ?

उत्तर - भारतीय अर्थव्यवस्था पूर्णतः कृषि पर आधारित है। कृषि से ही देश को विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्री प्राप्त होती है। इसी से विभिन्न प्रकार के उद्योगों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। इसके अलावा कृषि से रोजगार एवं विदेशी मुद्रा की भी प्राप्ति होती है। अत: हम कह सकते हैं कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।


15.भारत में गहन कृषि के लिए कौन-सी सुविधा पाई जाती है ? समझावें।

उत्तर- भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या का दबाव और सीमित कृषि योग्य भूमि के कारण गहन कृषि अपनाई गयी है।
भारत मानसूनी वर्षा वाला देश है। वर्षा एक विशेष मौसम में होती है और अनियमित रूप से होती है कहीं बाढ़ जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है और कहीं वर्षा का अभाव देखने को मिलता है। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई का सहारा लिया जाता है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सदा जलपूरित रहती हैं। उन नदियों पर बाँध बनाकर नहरें निकाली गयी है और उनसे जलाभाव क्षेत्रों की सिंचाई की सुविधा प्रदान की गयी है। भारत के मैदानी भागों में जलोढ़ मिट्टी पायी जाती है जो अत्यंत उपजाऊ है इन्हीं कारणों से भारत में गहन कृषि की जाती है।


16. गहन जीविका कृषि किसे कहते हैं ?

उत्तर- इस प्रकार की कृषि का प्रचलन उन जगहों पर जहाँ जनसंख्या का दबाव बहुत अधिक है। इसमें श्रम की अधिकता होती है। परंपरागत कृषि कौशल का भी इसमें भरपूर उपयोग किया जाता है। इसमें खाद्यान्न फसलों को ही उपजाया जाता है। इसे जीविका निर्वाह कृषि भी कहा जाता है।


17. भारत को कृषि प्रधान देश क्यों कहा जाता है ?

उत्तर- भारत की 51 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर ही निर्भर है। सकल घरेलू उत्पादन में भी इसका योगदान लगभग 13.7 प्रतिशत है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। यही कारण है कि भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है।

18. वाणिज्यिक कृषि किसे कहते हैं ?

उत्तर- कृषि का वह तरीका जिसमें भारी मात्रा में उत्पादन करके बेचा जाता है। अतः किसान अपनी लगाई गई पूँजी से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सके। इस प्रकार के कृषि में उन्नत बीज, रासायनिक खाद, सिंचाई, रासायनिक कीटनाशक आदि का अधिक उपयोग होता है। हरित क्रांति के क्षेत्र में इसका प्रसार अधिक है।

19. ऑपरेशन फ्लड क्या है ?

उत्तर- दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए श्वेत क्रांति के माध्यम से चलाया गया एक अभियान था। इसके प्रणेता थे डॉ० वर्गीज कुरियन।


20. प्रारंभिक जीविका कृषि किसे कहते हैं ?

उत्तर- इस प्रकार के कृषि पद्धति में किसान सिर्फ इतने ही फसल का उत्पादन करता है जिससे उसका एवं उसके परिवार का भरण-पोषण हो सके।

21. भारतीय कृषि की दो सबसे बड़ी समस्या लिखें।

उत्तर - भारतीय कृषि की दो सबसे बड़ी समस्याएँ हैं
(i) वैज्ञानिक पद्धति का कुछ ही क्षेत्रों में प्रसार
(ii) फसलों का प्रति एकड़ कम उत्पादन।


22. श्वेत क्रांति किसे कहते हैं ?

उत्तर :- श्वेत क्रांति अथवा ऑपरेशन फ्लड का संबंध दुग्ध उत्पादन से है। इसको दुग्ध के अधिक मात्रा में उत्पादन के लिए चलाया गया था।


23. भारत में उपजने वाली दो खाद्य, नकदी एवं रेशेवाली फसलों के नाम लिखें।

उत्तर -
खाद्य फसल - धान, गेहूँ
नकदी फसल – चाय, कहवा
रेशेदार फसल – कपास, जूट।

24. जीवन निर्वाह कृषि से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर - जीवन निर्वाह कृषि उस कृषि को कहते हैं, जिसमें उत्पादन का लक्ष्य अपना तथा अपने परिवार का करण पोषण मात्र है। इस प्रकार की कृषि मुख्य रूप से विकासशील देश तथा पिछड़े देशों में देखने को मिलती है। इस प्रकार की कृषि में सुविधाओं की नमी के कारण प्रति हेक्टर उत्पादन काफी कम होता है।

25. हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर– सन् 1960 के दशक में पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तरप्रदेश में कृषि के क्षेत्र में एक क्रांति हुई थी जिसे हरित क्रांति कहते हैं। यह भारत को कृषि के मामले में आत्मनिर्भर बनाया। इसमें सर्वाधिक उपज गेहूँ की हुई थी। इस क्रांति के जनक डॉ० एम०एस० स्वामीनाथन थे। इसमें उत्तम बीजों एवं खाद का प्रयोग किया गया था।


26. चावल की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।

उत्तर- चावल के उत्पादन की उपयुक्त दशाएँ–
धान से चावल बनाया जाता है। धान मानसूनी जलवायु का फसल है जिसके लिए निम्नांकित दशाएँ उपयुक्त होती हैं
(i) उच्च तापमान (20°C से 30°C के बीच),
(ii) पर्याप्त वर्षा (200 cm वार्षिक वर्षा) कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उत्तम सिंचाई
की व्यवस्था आवश्यक होती है,
(iii) समतल भूमि ताकि खेतों में पानी जमा रह सके,
(iv) जलोढ़ दोमट मिट्टी धान की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है,
(v) पर्याप्त सस्ते श्रमिक।

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